NEET पेपर लीक जांच में बड़ा खुलासा! CBI के रडार पर RCC इंस्टीट्यूट, 21 में से 19 छात्रों को मिला AIIMS में एडमिशन

नई दिल्ली: NEET पेपर लीक मामले की जांच में जुटी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को अब एक और बड़ा सुराग मिला है। मामले में गिरफ्तार किए गए शिवराज मोटेगांवकर के कोचिंग संस्थान RCC इंस्टीट्यूट को जांच एजेंसी ने अपने रडार पर ले लिया है। जांच में सामने आया है कि वर्ष 2025 में इस संस्थान से चयनित 21 छात्रों में से 19 को देश के प्रतिष्ठित AIIMS संस्थानों में दाखिला मिला था।

इसके अलावा RCC इंस्टीट्यूट के 2 अन्य छात्रों ने मुंबई के KEM अस्पताल में एडमिशन हासिल किया था। अब इन असामान्य परिणामों को लेकर CBI गहराई से जांच कर रही है।

पुराने रिकॉर्ड खंगाल रही जांच एजेंसी

CBI अब RCC इंस्टीट्यूट के पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि क्या वर्ष 2025 से पहले भी शिवराज मोटेगांवकर के पास NEET परीक्षा के प्रश्नपत्र पहले से पहुंचते थे।

जांच के दौरान पिछले 4 से 5 वर्षों में RCC से सफल हुए छात्रों के नंबर, रैंक और चयन रिकॉर्ड को भी खंगाला जा रहा है। जांच एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि संस्थान की लगातार बड़ी सफलता के पीछे सिर्फ शैक्षणिक तैयारी थी या फिर किसी बड़े नेटवर्क का खेल चल रहा था।

NEET रिजल्ट को बनाया गया था मार्केटिंग का हथियार

सूत्रों के मुताबिक RCC इंस्टीट्यूट अपने सफल छात्रों की रैंक, नंबर और मेडिकल कॉलेजों में हुए चयन को बड़े पैमाने पर प्रचारित करता था। यही उसकी सबसे बड़ी मार्केटिंग रणनीति मानी जाती थी।

अब जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इन शानदार रिजल्ट्स के पीछे पेपर लीक या परीक्षा प्रणाली से जुड़ी कोई गड़बड़ी तो नहीं थी।

कौन हैं शिवराज मोटेगांवकर?

RCC इंस्टीट्यूट के संचालक शिवराज मोटेगांवकर को CBI पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। महाराष्ट्र के कोचिंग जगत में उन्हें “एम सर” के नाम से जाना जाता है। वह लातूर के रहने वाले केमिस्ट्री शिक्षक हैं और उन्होंने RCC Classes यानी रेनुकाई केमिस्ट्री क्लासेस को राज्य के बड़े NEET-JEE कोचिंग ब्रांड्स में शामिल किया था।

CBI अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है और यह जांच की जा रही है कि पेपर लीक मामले में और कौन-कौन लोग शामिल थे।

 

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